Wednesday, 15 November 2017

रतना रायका का इतिहास भाग 10

जै बाबा री सा

रतना रायका का इतिहास भाग 10

🙏  इधर रतना सुगना और भाणु ऊंट पर सवार होकर चले। पुंगलगढ़ से रुणिचा के बीच रात्रि विश्राम किया। वही पर चार *चोर लुटेरो* ने घेरा देकर ललकार कर रतना और सुगना से कहां जो कुछ तुम्हारे पास आभूषण है और दो और चले जाओ नहीं तो लडने मरने के लिए तैयार हो जाओ।  रतना ने कमर कस कर युद्ध की तैयारी की घमासान युद्ध छिड़ा किन्तु अकेला होने के कारण कुछ ही देर में हताश हो गया।

🙏  लुटेरों ने उसके बोझे का समान ऊंट सहित लेकर तथा सुगना बाई के आभूषण उतरवा कर भी ले लिये। इधर घायल रतना और सुगना विलाप करके रामदेव जी को याद करने लगे।

🙏 इतना कहकर सुगना मरने के लिए कटार संभाल कर उपक्रम करने लगी और रतना से कहने लगी कि मेरे पुत्र को रुणिचा ले जाना यहां जैसी होनहार है यह होगी।

🙏 ऐसे दुःखमय जीवन से जीना ही क्या। इधर रात्रि को पलंग पर पौढे रामदेव जी को कर्ण पिशाचनी सिद्धी से रतना और सुगना की पुकार को कान में सुनाई, निद्रा से ओझल कर रामदेव जी अपनी आध्यात्मिक शक्ति सिद्धि स्वरूप से घोड़े पर सवार होकर चले और वायु वेग से सुगना के पास पहुंचकर आवाज़ दी बहन मैं आ गया हूं। घबरा मत इतना कहकर चारों के पीछे बढ़े और पीछे से ललकार से भागते सब लूटेरों से कहने लगे ठहरो।  यदि आगे भागने की कोशिश की तो एक को बांधकर मारूंगा। इतना कहते कहते तीनों लुटेरों को भाले से मार दिया। चौथे को पकड़कर पूछने लगे सावधान होकर बतला दे कि तुमने किसके सिखाने से मेरी बहन को लूटा यह सुनकर चोर ने अपने साथियों को मरा जानकर डरते हुए प्राणदान याचना करते हुए बताया महाराज। दिल्ली के मुगल बादशाह की आज्ञा से आपकी बहन को लूटा है। रामदेवजी ने उसे प्राण दान देते हुए छोड़ते हुए कहा तेरे *बादशाह को कह देना कि मेरी सिद्धि शक्ति को परखना या देखना हो तो अपनी फौज सजाकर रुणिचा* पर अपनी शक्ति चढ़ा कर लेना मैं तैयार हूं इतना कहकर उसे छोड़ कर ऊंट तथा वस्त्र आभूषण सामान ला कर रतना व सुगणा को देते हुए कहकर चले, अब मैं जाता हूँ तुम जल्दी से आ जाना

🙏 तीन दिन के लंबे मार्ग पर चलकर मार्ग में एक जगह थक कर विश्राम किया लंबी यात्रा मार्ग में भूख प्यास वायु परिवर्तन का ऊंट पर बैठे ही बैठे की सवारी यात्रा के कारण सुगना के पुत्र का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। तीनों को थकावट के कारण नींद आ गई। प्रभाव की शंख शहनाई की आवाज कान में सुनने को आई तो जाग कर देखा कि राम सरोवर के किनारे पर सोये है। इस प्रकार रामदेव जी के प्रयाण सिद्धि चमत्कार को देखकर रतना और सुगना को बड़ा आश्चर्य हुआ । उठकर रतना सुगना और भांजा तीनों महलों में पहुंचे।

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