जय बाबै री सा
यह सब सुनकर सुगना उठकर बाग में भाई रामदेव जी के पास पहुंची और गले लगा कर रोती आंसू टपकाती मिली। तब रामदेव जी ने कहा बाई रोती क्यो हैं? आज पुंगलगढ़ के पड़िहारो का नामो निशान हमेशा के लिए मिटा रहा हूँ। कामडियो भक्तो का तम्बूरीयो की ताल सुनकर मज़ा देख ले। यह सुनकर सुगना ने कहा भाई। अब इनके सभी अपराधों को क्षमा कर दो भाई। अब इनके कलंक रह जाएगा। अपने सुहाग की भीख मांगकर कहती हूँ कि खोटी करनी का फल सबको मिल गया रामदेव जी ने कहा बहिन पहले तो तू तुंवरो को कोस रही थी। जो तुम्हारी इच्छा है , लड़ाई बंद करता हूँ। कह कर विजय सूचक पंचानन की ध्वनि करके हनुमान तथा दुर्गे माता आदि सब देव सेना को विदाई दी इतने में पांच पुत्रों को लेकर सुगना की सास भी आकर रामदेव जी के चरणों में दंडवत प्रणाम करके क्षमा मांग के फूट फूट कर रोने विलाप करने लगे और कहने लगे। हमारी गलती माफ करो आपका परिचय हम सबको मिल गया रतना को हमने परखने के लिए काल कोठड़ी में बंद कर दिया है सो आप निकलवा दो। हमें क्षमा करके प्राणदान दे दो।
खटके ताला टुटीया।
जटके पडिया जंजीर।।
रतनो हाजर हो गयो।
थाने रगं हो रामापीर।।
रतना बारंबार रामदेव जी के चरणों में गिरकर प्रणाम करता बहुत विनती करने लगा।
सुगना बाई के पति ईशन सिंह जी अपने बड़े भाई विजय सिंह के सहित प्रार्थना करके रामदेव जी से कहने लगे आप पधारो आपकी बहन को हम जल्दी ही रतना के साथ रवाना कर रहे हैं यह सुनकर रामदेव जी अपनी योग कला द्वारा लौटकर पोकरण गढ़ पहुंचे और माता पिता को समाचार दिए सुगना आ रही है यह सुनकर सबको बड़ी प्रसन्नता हुई यह सारा कार्य तीन घंटे के बाद एक पहर में संपन्न हुआ।
उधर पड़िहारो के परिवार ने सास सहित मिलकर सुगना को पोकरण जाने के लिए विदाई दी तब गांव से बाहर पहुचने आई और शकुन देखे तो दाहिने तीतर, बायें गधा भौंका इत्यादि अपशकुनों को देखकर सास ने कहां बहू! पुत्र को साथ मत ले जा, घर पर तुम्हारे देवर का लग्न है बालक अभी पांच वर्ष का छोटा है रास्ते में भूख प्यास तकलीफों को वो सहन नहीं कर सकेगा। अगर बालक को कुछ हुआ तो तुझे पुंगलगढ़ में जगह नही मिलेगी। भारी जाती हैं खाली आवेगी। इसलिए पुत्र को यही छोड़ दो। यह सुनकर सुगना ने वात्सल्य भाव को प्रकट करते हुए कहा। भगवत कृपा से मेरा भाई बड़ा सिद्ध चमत्कारी है मुझे सकून क्या बिगाड़ेंगे। तब हठ देखकर सांस ने जलती बलती सुनाकर घर का रास्ता लिया।
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रतना रायका का इतिहास भाग 9
यह सब सुनकर सुगना उठकर बाग में भाई रामदेव जी के पास पहुंची और गले लगा कर रोती आंसू टपकाती मिली। तब रामदेव जी ने कहा बाई रोती क्यो हैं? आज पुंगलगढ़ के पड़िहारो का नामो निशान हमेशा के लिए मिटा रहा हूँ। कामडियो भक्तो का तम्बूरीयो की ताल सुनकर मज़ा देख ले। यह सुनकर सुगना ने कहा भाई। अब इनके सभी अपराधों को क्षमा कर दो भाई। अब इनके कलंक रह जाएगा। अपने सुहाग की भीख मांगकर कहती हूँ कि खोटी करनी का फल सबको मिल गया रामदेव जी ने कहा बहिन पहले तो तू तुंवरो को कोस रही थी। जो तुम्हारी इच्छा है , लड़ाई बंद करता हूँ। कह कर विजय सूचक पंचानन की ध्वनि करके हनुमान तथा दुर्गे माता आदि सब देव सेना को विदाई दी इतने में पांच पुत्रों को लेकर सुगना की सास भी आकर रामदेव जी के चरणों में दंडवत प्रणाम करके क्षमा मांग के फूट फूट कर रोने विलाप करने लगे और कहने लगे। हमारी गलती माफ करो आपका परिचय हम सबको मिल गया रतना को हमने परखने के लिए काल कोठड़ी में बंद कर दिया है सो आप निकलवा दो। हमें क्षमा करके प्राणदान दे दो।
खटके ताला टुटीया।
जटके पडिया जंजीर।।
रतनो हाजर हो गयो।
थाने रगं हो रामापीर।।
रतना बारंबार रामदेव जी के चरणों में गिरकर प्रणाम करता बहुत विनती करने लगा।
सुगना बाई के पति ईशन सिंह जी अपने बड़े भाई विजय सिंह के सहित प्रार्थना करके रामदेव जी से कहने लगे आप पधारो आपकी बहन को हम जल्दी ही रतना के साथ रवाना कर रहे हैं यह सुनकर रामदेव जी अपनी योग कला द्वारा लौटकर पोकरण गढ़ पहुंचे और माता पिता को समाचार दिए सुगना आ रही है यह सुनकर सबको बड़ी प्रसन्नता हुई यह सारा कार्य तीन घंटे के बाद एक पहर में संपन्न हुआ।
उधर पड़िहारो के परिवार ने सास सहित मिलकर सुगना को पोकरण जाने के लिए विदाई दी तब गांव से बाहर पहुचने आई और शकुन देखे तो दाहिने तीतर, बायें गधा भौंका इत्यादि अपशकुनों को देखकर सास ने कहां बहू! पुत्र को साथ मत ले जा, घर पर तुम्हारे देवर का लग्न है बालक अभी पांच वर्ष का छोटा है रास्ते में भूख प्यास तकलीफों को वो सहन नहीं कर सकेगा। अगर बालक को कुछ हुआ तो तुझे पुंगलगढ़ में जगह नही मिलेगी। भारी जाती हैं खाली आवेगी। इसलिए पुत्र को यही छोड़ दो। यह सुनकर सुगना ने वात्सल्य भाव को प्रकट करते हुए कहा। भगवत कृपा से मेरा भाई बड़ा सिद्ध चमत्कारी है मुझे सकून क्या बिगाड़ेंगे। तब हठ देखकर सांस ने जलती बलती सुनाकर घर का रास्ता लिया।
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