जय बाबै री सा
रतना रायका का इतिहास भाग 3
घर में विवाह के बाद लड़कियां कई बार पीहर आती है, जवाई सा लेने आते हैं, गीत राग बधाइयों से माता-पिता उनके साथ कन्या को भेजते हैं। परंतु मेरे भाग्य में ऐसा सुख लिखा ही नहीं। जो रामदेव और वीरम देव जैसे भाई होते हुए भी इस अवसर पर सुगना को नहीं ला सके तो फिर मेरे जीवन में उसका सुख देखना लिखा ही नहीं।
रामदेवजी ने सारा वृत्तांत सुना और अपनी पोशाक पहनकर माता से कहने लगे। "मां! मैं पुंगलगढ़ सुगना को लेने जा रहा हूं" माता ने समझाया बेटा! हाथों में मेहंदी लगी है बाने बैठा हुआ मौली बंधा हुआ तुम घर के बाहर आ नहीं जा सकते सो गांव के बाहर पुंगलगढ़ तो दूर की बात है माता का कहना मानकर समझकर रामदेव जी ने अपने सखा रतना नामक रायका को बुलाया कहा-रतना! तुझे अभी ऊंट तैयार कर पुंगलगढ़ जाकर बाई सुगना को लाना है।
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रतना रायका का इतिहास भाग 3
घर में विवाह के बाद लड़कियां कई बार पीहर आती है, जवाई सा लेने आते हैं, गीत राग बधाइयों से माता-पिता उनके साथ कन्या को भेजते हैं। परंतु मेरे भाग्य में ऐसा सुख लिखा ही नहीं। जो रामदेव और वीरम देव जैसे भाई होते हुए भी इस अवसर पर सुगना को नहीं ला सके तो फिर मेरे जीवन में उसका सुख देखना लिखा ही नहीं।
रामदेवजी ने सारा वृत्तांत सुना और अपनी पोशाक पहनकर माता से कहने लगे। "मां! मैं पुंगलगढ़ सुगना को लेने जा रहा हूं" माता ने समझाया बेटा! हाथों में मेहंदी लगी है बाने बैठा हुआ मौली बंधा हुआ तुम घर के बाहर आ नहीं जा सकते सो गांव के बाहर पुंगलगढ़ तो दूर की बात है माता का कहना मानकर समझकर रामदेव जी ने अपने सखा रतना नामक रायका को बुलाया कहा-रतना! तुझे अभी ऊंट तैयार कर पुंगलगढ़ जाकर बाई सुगना को लाना है।
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