Saturday, 22 July 2017

रतना रायका का इतिहास भाग 6

जय बाबै री सा

रतना रायका का इतिहास भाग 6

पुष्टि करते हुए अन्य सभासद बोले हां भाई दो गांव के मालिक तुंवर भी भगवान के अवतार और सिद्ध है देखें  इनकी अकल पुरुषार्थ को।

 विजयसिंह बोले यह अजमलजी कि चाल है केवल हमें नीचा दिखाने को निमंत्रण भेजा है सच्चा प्रेम होता तो बाई को मौके पर पहले ही बुलवा लेते। यहां से 15 दिन का रास्ता है इसलिए रतना तू वापस चला जा।

इस प्रकार के अभिमान भरे अस्त-व्यस्त व्यंग शब्द चुनकर रतना का क्रोध भड़क उठा तब कड़क कर कहने लगा महाराज। आप अपने राज्य मद में छक रहे हैं। मुढ बुद्धि विवेकहीन तथा तुच्छता प्रमादवश जो कुछ कहते हो वह सब झूठ बकवास है।  आपको मालूम नहीं है रामदेव जी, भक्तों की सहायता के लिए हर समय तैयार है, आप सुगना बाई को भेज दो इसमें आप सबकी भलाई है तथा भली इज्जत रह जाएगी नहीं तो इस झगड़े को मोल मत लो फिर वज्र के चने चबाना कठिन हो जाएंगे।

यह सुनकर विजय सिंह का खून खौल उठा और क्रोधाग्नि में होंठ फड़कने लगे, आंख लाल करके अपने चाकरों को आज्ञा देते हुए बोले इस रायका को काल कोठड़ी में डाल दो और ऊंट को पायगो में बांध दो।

 (मैं इस बात की पुष्टि नही करता हूँ की रतना रायका को काल कोठड़ी में डाला था या कुंए में औंधे मुंह लटकाया था।  क्योंकि कुछ लोग बताते हैं कि रतना को काल कोठड़ी में डाल दिया था पर देसी भजनों के माध्यम से सुनने में आता है कि रतना को कुंए में औंधे मुंह लटका दिया जाता हैं।)

अब इस भक्त की सहायता करने कब कामड़ देव रामदेव आते हैं। आज्ञा होते सब कुछ पालना कर दी गई।

 रणवास में सुगना बाई की ननद को मालूम हुआ तो सुगना के पास जाकर वह सदैव की भांति ताने का व्यंग कस कर पूरे समाचार चुनाते हुए वह बोली भाभी। तेरे भाई रामदेव का विवाह है, तुझे बुलाने को कुंकुम पत्रिका लेकर एक रायका आया था। उसको मेरे भाई ने काल कोठड़ी में बंद कर दिया।

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