Saturday, 22 July 2017

रतना रायका का इतिहास भाग 8

रतना रायका इतिहास भाग 8

जय बाबै री सा

 चौसठ जोगणियों और बावन भैरवों ने रक्त खप्पर खोपड़ियों की ताल बजाकर घमासान तांडवमय युद्ध करने लगे तो रामदेव जी ने भी बीच-बीच में अपने बाण चला चला कर पड़िहारों में भगदड़ मचा दी तब विजय सिंह अपने चारो भाइयों को लेकर माता की शरण में आ गए और कहां मां हमको बचाओ?

 हमारी सब फौज मारी गई इत्यादि विलाप को सुनकर ढाढस बंधाते हुए माता ने एक अंधेरी कोठरी में पांच भाइयों को बंद कर के दरवाजे पर शीला सरका दी। अंधेरी कोठरी में भी देव माया से हजारों बिच्छुओं ने डंक मारे जिससे पांचों पडियार चिल्लाने लगे। हाय हमें कोई बचाओ ?

अपने पुत्रों की दीन दशा देखकर माता दौड़ती हुई आई सुगना के पास पहुंची और कहने लगी बहू तुम्हारे पैरो में पड़ती हूं,  अपने भाई को समझाओ तो लड़ाई बंद करे मैं मेरे पांचों कुमार पड़िहारो का जीवन दान मांगती हूँ।  हमारे सब अपराधों को क्षमा कर दो, नहीं तो पुंगलगढ़ का उजाड़ हो जाएगा। यह कह कर  सुगना ने कहा।

 आप सब कहते थे, कामड़ो की बेटी के क्या करेगी? तुंवर तो तम्बुरिये हैं, अब वह वीरता रजपूती कहाँ गयी। मेरे अकेले भाई पर सारी फ़ौजों का रिसाला व तोपखाना चढ़ाया गया। लड़ो तम्बुरिये कामड़ो से, मारू राग गावो इन प्रकार स्त्री स्वभाव को प्रकट करते सुन कर सास कहने लगी देवी बहू! क्षमा करो सब भूलों को, यह बातों का समय नही  हैं।

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