जय बाबै री सा
रतना रायका इतिहास भाग 2
माता मैणादे रामदेव जी के स्वभाव को जानती थी, उसने शांति से धीरज बंधाते हुए समझाकर कहा- बेटा! आपका अभी लगन चढ़ा समय है। आप घर से कहीं बाहर नही जा सकते हैं कर्म का लिखा कोई मिटा नही सकता। भाग्य का संयोग बड़ा विचित्र अमिट अक्षय हैं माता ने स्त्री स्वभाव के उपक्रम बनाते हुए कहना जारी रखा सुगना का बड़ा अच्छा घराना देखकर विवाह किया, परंतु ऐसी कभी आशा नहीं थी कि पडियार इतने हटी और निखट्टू निकलेंगे। जब से सुगना को विवाह करके पुंगलगढ़ भेजी है तब से मैंने उसका मुख नहीं देखा आज उसकी याद करके छाती में प्रेम उमड़ आया हैं।और प्रेमाश्रुओं से आंखें भर आई। शायद लाला आपके विवाह की पत्रिका भी पहुंची या नहीं कोई पता नहीं।
✍
रतना रायका इतिहास भाग 2
माता मैणादे रामदेव जी के स्वभाव को जानती थी, उसने शांति से धीरज बंधाते हुए समझाकर कहा- बेटा! आपका अभी लगन चढ़ा समय है। आप घर से कहीं बाहर नही जा सकते हैं कर्म का लिखा कोई मिटा नही सकता। भाग्य का संयोग बड़ा विचित्र अमिट अक्षय हैं माता ने स्त्री स्वभाव के उपक्रम बनाते हुए कहना जारी रखा सुगना का बड़ा अच्छा घराना देखकर विवाह किया, परंतु ऐसी कभी आशा नहीं थी कि पडियार इतने हटी और निखट्टू निकलेंगे। जब से सुगना को विवाह करके पुंगलगढ़ भेजी है तब से मैंने उसका मुख नहीं देखा आज उसकी याद करके छाती में प्रेम उमड़ आया हैं।और प्रेमाश्रुओं से आंखें भर आई। शायद लाला आपके विवाह की पत्रिका भी पहुंची या नहीं कोई पता नहीं।
✍
No comments:
Post a Comment