जय बाबै री सा
रतना रायका का इतिहास भाग 5
यह सब सुनकर विजय सिंह ने अपने सरदारों के सामने देखकर हंसते हुए एक व्यंग कसा
तम्बुरिये भक्त तुंवरो में भगवान के बाप का निमंत्रण आ गया हैं।नीच ऊंच की मर्यादा छोड़ सायर मेघवाल के घर आना जाना और उनकी छोकरियां (डाली बाई) घर का काम करें तो कहां रही रजपूती। रणसिंहजी भी घर घर तंबूरा खड़काते और उनका बेटा अजमल तो कहीं दिन तक भक्त बना द्वारकाधीश की यात्रा करता रहा अब उनका पौता सिद्ध बाबा कहलाता है। यह तो इनकी खानदानी आदत है। यदि सुगना पीहर आती जाती रहती तो आज तक पिछले बीस वर्षों में पुंगलगढ़ में भी तम्बुरिये घुस जाते" एक अन्य सरदार ने पुष्टि करते हुए कहा अजमलजी के दो कुंवर है छोटा कुंवर तो कामड़ो जैसा गाने बजाने वाला के साथ घूमता रहता है और बड़ा ही सिद्ध बना रहता है एक अन्य सभासद बोला पुंगलगढ़ से पोकरण कितना दूर है ? कितने दिनों का रास्ता हैं ? इस पर तो तुंवरो ने विचार नहीं किया ? लगन के बाकी छ:दिन है और अब बुलावा भेजा ताकि समय पर कोई पहुंच ना सके और बुलाने का बहाना भी सध जाय।
यह सुनकर अन्य सभासदों ने कहा- सुना है अमरकोट के दलराज सोढा की अंधी पंगुली एवम अष्टवक्री कन्या है जो कही किसी के वरण न करने पर तुंवरो के गले बांध दी है।
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रतना रायका का इतिहास भाग 5
यह सब सुनकर विजय सिंह ने अपने सरदारों के सामने देखकर हंसते हुए एक व्यंग कसा
तम्बुरिये भक्त तुंवरो में भगवान के बाप का निमंत्रण आ गया हैं।नीच ऊंच की मर्यादा छोड़ सायर मेघवाल के घर आना जाना और उनकी छोकरियां (डाली बाई) घर का काम करें तो कहां रही रजपूती। रणसिंहजी भी घर घर तंबूरा खड़काते और उनका बेटा अजमल तो कहीं दिन तक भक्त बना द्वारकाधीश की यात्रा करता रहा अब उनका पौता सिद्ध बाबा कहलाता है। यह तो इनकी खानदानी आदत है। यदि सुगना पीहर आती जाती रहती तो आज तक पिछले बीस वर्षों में पुंगलगढ़ में भी तम्बुरिये घुस जाते" एक अन्य सरदार ने पुष्टि करते हुए कहा अजमलजी के दो कुंवर है छोटा कुंवर तो कामड़ो जैसा गाने बजाने वाला के साथ घूमता रहता है और बड़ा ही सिद्ध बना रहता है एक अन्य सभासद बोला पुंगलगढ़ से पोकरण कितना दूर है ? कितने दिनों का रास्ता हैं ? इस पर तो तुंवरो ने विचार नहीं किया ? लगन के बाकी छ:दिन है और अब बुलावा भेजा ताकि समय पर कोई पहुंच ना सके और बुलाने का बहाना भी सध जाय।
यह सुनकर अन्य सभासदों ने कहा- सुना है अमरकोट के दलराज सोढा की अंधी पंगुली एवम अष्टवक्री कन्या है जो कही किसी के वरण न करने पर तुंवरो के गले बांध दी है।
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